Saturday, 21 March 2020
Thursday, 5 March 2020
Thursday, 20 February 2020
Saturday, 15 February 2020
Friday, 14 February 2020
छाया गीत ,आपके अनुरोध या मनचाहे गीत ऐसे कितने ही नामों से मेरे साथ साथ उस समय के सभी लोग परिचित होंगे और नहीं सुनने की स्थिति में मिस करते होंगे।अगर आप हिंदी फिल्मी गीतों के शौकीन हैं तो निश्चित तौर पर रेडियो सीलोन के अमीन सयानी के साफ़्ताहिक बिनाका गीत माला के पायदानों को लेकर अपने दोस्तों से बाज़ी लगाई होगी ।जिसे सुनकर मुझे हमेशा अपने फौजी भाइयों से जुड़े होने का अहसास होता है ।इसके साथ ही अमूमन सभी पर्व के दिनों में उनसे जुड़े रेडियो के गीतों ने खूब सराहा होगा ।जी हाँ ,मैं विविध भारती और आल इंडिया रेडियो की बात कर रही हूं जो हमारे स्कूल और कॉलेज के समय का आल टाइम फ़ेवरेट था । जब भी मैं अपने बचपन के दिनों को याद करती हूं तो मेरी यादों में दूसरे चीजों के साथ साथ रेडियो की मधुर आवाज गूंज उठती है ।आल इंडिया रेडियो की आवाज के साथ जो प्रोग्राम की शुरुआत होती वो सुबह रंगावली ,चित्रलोक से होती हुई सुबह की सभा समाप्ति के साथ दोपहर और रात के ग्यारह बजे तक चलता । वो समय था चाबियों वाली घड़ियों का ।तो सुबह आठ बजे के समाचार के साथ सभी घड़ियों में चाबी भरीं जाती और उसके साथ ही हम स्कूल जाने की तैयारी करते ।समाचारों का महत्व तो उस वक़्त हमारे लिए नहीं था तो गानों के बीच पापा जब स्टेशन बदल कर प्रादेशिक समाचार सुनते तो हम बिल्कुल ही भन्ना जाते ।इसी बीच स्कूल पास कर मैं कॉलेज में पहुंच गई ,दीदी की शादी और भइया के पढ़ाई करने के लिए दिल्ली जाने के कारण घर में अकेली पर गयी ।इस दौर में रेडियो ने मेरे अच्छे दोस्त की भूमिका निभाई । समय के साथ साथ टेलीविजन घरों पर राज करने लगा उसी क्रम में vcp और CD player जैसे यंत्र आए उसी तरह रेडियो में FM जुड़ गए लेकिन समय के साथ साथ पता नहीं कब विविध भारती पीछे छूट गया । कुछ साल पहले बाजार में Caarva आया जिसमें 2000 से लेकर 5000 गाने दिए गए थे पर बात बिल्कुल जमी नहीं । विगत कुछ वर्षों से मैं अपने पुराने रेडियो के लिए लालायित रहती थी जो बिल्कुल साधारण हो जिसमें पेनड्राइव या ब्लूटूथ वाली विशेषताएं भी न हो और न तो Caarva की तरह HMV के सदाबहार गाने से भरा पड़ा हो और न ही FM की तरह शोर शराबों से भरा हो ।बस मैं उसे बिजली या बैटरी की सहायता से सुनूं ।यहां मैं जिक्र करना चाहूंगी हमारे शहर के बड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की दुकान का ,जब वहां बैठे 20-22 वर्षीय सेल्समैन से मैंने रेडियो दिखाने को कहा छुटते ही उसने पूछा ,रेडियो मतलब ? उफ ये नई पीढ़ी !लेकिन मेरी खोज कल जा कर पूरी हुई जब पतिदेव ने दसियों दुकानों में खोजने के बाद philips का वैसे ही पुराने ढ़ंग का रेडियो खरीद लिया ।यकीन मानिए उसे सुनकर मुझे ऐसा लगा कि मेरे स्कूल कॉलेज के दिन लौट आए हैं जब मैं इन गीतों के साथ पढ़ाई करती थींऔर यहां सबसे अच्छी बात यह है कि एकाध को छोड़कर सारे कार्यक्रम वही हैं फिर चाहे वो संगीत सरिता हो ,हेल्लो फरमाइश ! धन्यवाद विविध भारती ,धन्यवाद पति महोदय मुझे अपनी पुरानी यादों से जोड़ने के लिए।
Monday, 6 January 2020
Monday, 4 November 2019
मेरी एक परिचिता का कहना है कि हर पति या पत्नी को चाय जरूर पीनी चाहिए क्योंकि इसी चाय के बहाने दोनों एक साथ बैठते हैं और आपस में बात चीत होती रहती है । ये बात चाहे मजाक में कही गई हो या स्वास्थ्य के लहजे से बिल्कुल गलत हो लेकिन अगर इस बात के सकारात्मक पहलू की ओर से सोचे तो यकीकन इसके पीछे की मूल बात है कि आपसी रिश्तों में संवाद का महत्व । इस विषय में जनसाधारण की सोच मैं नहीं जानती लेकिन
इस बात से कोई भी इंकार नहीं कर सकता है कि आज के समय में लोगों में संवादहीनता ने एक बड़ी समस्या का रूप ले लिया है । आज मैंने पेपर में श्री एन रघुरामन का पोस्ट पढ़ा जिसमें उन्होंने मुंबई के लोकल ट्रेन की बात रखी थी जहाँ लोग अपने मोबाइल में इतने तल्लीन थे
कि न तो वे आने वाले स्टेशनों के बारे में कुछ जान रहे थे और न ही अपने अगल बगल यात्रियों को देख पा रहे थे ।मुंबई तो मायानगरी है और वहां के इस तरह का बर्ताव की आशा हम सुनते आए हैं लेकिन मैंने ऐसा महसूस किया है कि आज रिश्तों में औपचारिकता बढ़ती जा रही हैं । विवादों से बचने या कई अन्य कारणों से लोगों में बात करना बहुत कम होता जा रहा है। पहले की तरह अब शायद रिश्तों की गरमाहट घटती जा रही है ।काफी हद तक इसके लिए मोबाइल को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है लेकिन इस तरह के व्यवहार के लिए मोबाइल भी एक कारण हो सकता है लेकिन इसे भी शत प्रतिशत दोषी नहीं माना जा सकता है क्योंकि होने वाले विकास का अच्छा और बुरा दोनों ही प्रभाव होता है और इसी के द्वारा हम संबंधों को खत्म करने की बजाय बढ़ा भी सकते हैं । अगर किसी को ये लगता है कि अगर हम किसी से बात न करें तो इससे हम होने वाले बहस या मतभेद से बच सकते हैं तो मुझे तो ये लगता है कि इस प्रकार की चुप्पी से मतभेद और बढेंगे ।एक ही घर में रहने के बाद भी एक दूसरे से औपचारिक तौर से मिलना या फिर कई बार महीनों या सालों बाद मिलने पर भी रिश्तों में गंभीरता।निश्चित रूप से इस तरह की संवादहीनता अच्छी नहीं कही जा सकती है ।पश्चिमी देशों की अंधी दौड़ में अपने पारिवारिक संस्कार को छोड़ना हर एक मसले पर सही नहीं कह सकते । जब हम आपस में खुशियां ,तनाव और मुश्किलों को साझा नहीं करेंगे तो निश्चय ही कई मानसिक और शारीरिक व्यधियों का शिकार बनेंगे । आपस में कहकहे न लगा कर योगासन के रूप में झूठे ठहाकों का साथ हमें खुशी नहीं दे सकता । बात करें ,खूब हँसे और अगर किसी तरह की शिकायत है तो उसे खत्म करें वो चाहे बहस करके हो या झगड़े से लेकिन किसी भी तरह से आपस की संवादहीनता को अपने बीच नहीं आने दे।