Monday, 31 August 2026

 अज्ञेय जी ने अपने साहित्यिक जीवन में मात्र तीन ही उपन्यास लिखे जिनमें से नदी के द्वीप को मनुष्य के मनोविज्ञान के विश्लेषण  के तौर पर उत्कृष्ट  रचना कही जा सकती है । 

किताब की हिन्दी सामान्य से जटिल मानी जा सकती है लेकिन ये हिन्दी शब्द आपके शब्दकोश में बढ़ोतरी कर सकते हैं । मोबाईल के इस युग में जब चिट्ठियों का लिखना अब आम लोगों के दरम्यान बंद हो गया है ,इस किताब में आधी कहानी को चिट्ठियों के द्वारा ही पाठकों के बीच परोसा गया है । किरदारों का कॉफी शॉप जाना ,ट्रेन के वैटिंग रूम का इस्तेमाल करना पिछले दिनों को याद दिलाता है । कहानी में दूसरे विश्व युद्ध के कारण अमेरिका द्वारा जापान पर बम गिराए जाने की चर्चा है । 

  इस कहानी के मुख्यत: चार किरदार हैं भुवन ,चंद्रमाधव ,रेखा और गौरा । भुवन पेशे से प्रोफेसर और वैज्ञानिक है । विज्ञान जैसे शुष्क विषय से जूरे होने के बावजूद वो बेहद संवेदनशील है । अपने मित्र चंद्र माधव के विपरीत स्त्रियों के प्रति उसकी सोच काफी प्रगतिशील है । रेखा से उसका  प्यार सीमाओं को लांघ जाता है लेकिन फिर भी वो रेखा की भावनाओ की कद्र करता है और उसे विवाह के लिए मजबूर नहीं करता और आहत होकर शोध के सिलसिले में जावा जाकर सबसे संपर्क तोर लेता है  । बाद के दिनों में देश के प्रति अपनी भक्ति के कारण वो सेना में भर्ती हो जाता है । 

चंद्रमाधव पेशे से पत्रकार है । किसी भी औरत के लिए उसकी सोच औरत के शरीर तक ही है । उसने बिना किसी ठोस वजह के अपने परिवार का त्याग कर लिया है और कोई भी औरत उसके लिए सहज प्राप्य है । अपने मतलब के लिए वह दो लोगों के बीच गलतफहमी पैदा करने की कोशिश करता है । 

रेखा अपने पति हेमेन्द्र से असफल वैवाहिक संबंध को पीछे छोरकर स्वतंत्र जीवन जीना चाहती है । वो भुवन से प्यार करती है लेकिन भुवन को बदनामी से बचाने के कारण उससे  विवाह नहीं कर पाती है । भुवन के प्रति रेखा का  ये व्यवहार उसे सामान्य से ऊपर रखता है । 

गौरा को भुवन ने बचपन से पढ़ाया है । उम्र के यथेष्ट फासला के बावजूद गौरा मन ही मन भुवन को चाहती है और इसी चाहत के कारण वो इतर विवाह नहीं करती । 

कहानी का अंत सुखद है । चंद्रमाधव एक बार फिर अपने परिवार को त्याग कर कॉम्युनिस्ट बन जाता है । रेखा अन्यत्र विवाह कर पति के साथ विदेश जाएंगी । भुवन और गौरा भविष्य में एक होंगे इस बात को जाहिर करती  कहानी खत्म हो जाती है ।